विश्व कुश्ती चैंपियनशिप: मनीषा भानवाला ने रचा इतिहास, जीता स्वर्ण

कज़ाकिस्तान की राजधानी अस्ताना (Astana) में आयोजित विश्व कुश्ती चैंपियनशिप 2026 (World Wrestling Championships 2026) में भारत की स्टार पहलवान मनीषा भानवाला (Manisha Bhanwala) ने स्वर्णिम इतिहास रच दिया है। मनीषा ने महिलाओं के 59 किलोग्राम फ्रीस्टाइल वर्ग के रोमांचक फाइनल मुकाबले में अमेरिका की मौजूदा पैन अमेरिकन चैंपियन एबिगेल नेट (Abigail Nette) को 8-6 से हराकर स्वर्ण पदक अपने नाम किया। इस अभूतपूर्व जीत के साथ ही 29 वर्षीय मनीषा सीनियर विश्व कुश्ती चैंपियनशिप के इतिहास में स्वर्ण पदक जीतने वाली भारत की पहली महिला पहलवान बन गई हैं।

0-6 से पिछड़ने के बाद मनीषा की धमाकेदार वापसी

फाइनल मुकाबला मनीषा के लिए बेहद चुनौतीपूर्ण शुरुआत लेकर आया था। अमेरिकी पहलवान एबिगेल नेट ने मुकाबले के पहले राउंड में बेहद आक्रामक खेल का प्रदर्शन किया और भारतीय पहलवान को रक्षात्मक रुख अपनाने पर मजबूर कर दिया। नेट ने शुरुआती पलों में ही 6-0 की बड़ी बढ़त हासिल कर ली थी। मैट पर मौजूद दर्शकों को लगने लगा था कि मुकाबला एकतरफा हो चुका है, लेकिन मनीषा ने संयम नहीं खोया और गजब के जुझारूपन का परिचय दिया।

दूसरे राउंड में मनीषा पूरी तरह से बदली हुई रणनीति के साथ मैट पर उतरीं। उन्होंने लगातार आक्रमण करते हुए पहले एक शानदार टेकडाउन हासिल किया और उसके तुरंत बाद विरोधी पहलवान को रोल करते हुए गट-रिंच टर्न के जरिए अंक बटोरे। इस शानदार दांव के दम पर उन्होंने स्कोर 6-6 से बराबर कर दिया। स्कोर बराबर होने के बाद भी मनीषा का दबाव जारी रहा और उन्होंने एक और जोरदार टेकडाउन लगाकर 8-6 की बढ़त हासिल कर ली। मुकाबले के अंतिम क्षणों में मनीषा ने मजबूत डिफेंस दिखाते हुए अमेरिकी पहलवान को कोई मौका नहीं दिया और खिताबी मुकाबला जीत लिया।

16 साल बाद भारत को मिला दूसरा विश्व खिताब

भारतीय कुश्ती के इतिहास में मनीषा भानवाला सीनियर स्तर पर विश्व चैंपियन बनने वाली कुल दूसरी भारतीय एथलीट हैं। उनसे पहले केवल दो बार के ओलंपिक पदक विजेता सुशील कुमार (Sushil Kumar) ने वर्ष 2010 में मॉस्को में पुरुषों के 66 किलोग्राम फ्रीस्टाइल वर्ग में स्वर्ण पदक जीता था। इसके बाद बीते 16 वर्षों में कोई भी भारतीय पुरुष या महिला पहलवान इस प्रतिष्ठित टूर्नामेंट में शीर्ष स्थान तक नहीं पहुंच सका था।

मनीषा की इस ऐतिहासिक उपलब्धि ने भारतीय महिला कुश्ती के दशकों पुराने सपने को साकार किया है। इससे पहले गीता फोगाट, बबीता फोगाट, विनेश फोगाट, पूजा ढांडा और अंतिम पंघाल जैसी दिग्गज पहलवानों ने सीनियर विश्व चैंपियनशिप में देश के लिए पदक जीते थे, लेकिन वे रजत या कांस्य पदक तक ही सीमित रही थीं। मनीषा ने स्वर्ण पदक का सूखा खत्म कर एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है।

मनीषा भानवाला की ऐतिहासिक उपलब्धि की मुख्य बातें

  • पहली महिला चैंपियन: मनीषा सीनियर विश्व कुश्ती चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीतने वाली भारत की पहली महिला पहलवान बनीं।
  • अविश्वसनीय कमबैक: फाइनल मुकाबले में 0-6 से पिछड़ने के बावजूद अमेरिकी पहलवान को 8-6 के स्कोर से शिकस्त दी।
  • 16 वर्ष बाद स्वर्ण: सुशील कुमार (2010) के बाद विश्व कुश्ती चैंपियनशिप में स्वर्ण जीतने वाली देश की दूसरी एथलीट बनीं।
  • अस्ताना में परचम: कज़ाकिस्तान के अस्ताना में 59 किलोग्राम फ्रीस्टाइल वर्ग में पैन अमेरिकन चैंपियन एबिगेल नेट को हराया।

रोहतक से विश्व मंच तक का स्वर्णिम सफर

हरियाणा के रोहतक जिले से ताल्लुक रखने वाली मनीषा भानवाला ने बेहद कम उम्र में अपने पिता के मार्गदर्शन और प्रोत्साहन पर कुश्ती की दुनिया में कदम रखा था। अपने शुरुआती दिनों में वजन कम करने के उद्देश्य से अखाड़े में उतरने वाली मनीषा ने धीरे-धीरे इस खेल को अपना जीवन बना लिया। उन्होंने अपने करियर में कई चोटों और चुनौतियों का सामना किया, लेकिन कभी हार नहीं मानी।

मनीषा वर्ष 2025 में अम्मान में आयोजित एशियाई कुश्ती चैंपियनशिप में भी स्वर्ण पदक जीत चुकी हैं और दक्षिण एशियाई खेलों (South Asian Games) में भी उनका प्रदर्शन स्वर्ण पदक विजेता का रहा है। कर्नाटक के विजयनगर स्थित इंस्पायर इंस्टीट्यूट ऑफ स्पोर्ट्स (Inspire Institute of Sport) में कड़ी ट्रेनिंग करने वाली मनीषा की यह जीत भारतीय खेलों के लिए एक मील का पत्थर साबित होगी।

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