चेन्नई: भारत की रुतुजा भोसले (Rutuja Bhosale) और वैष्णवी अडकर (Vaishnavi Adkar) ने चेन्नई ओपन डब्ल्यूटीए 250 टूर्नामेंट के महिला डबल्स फाइनल में प्रवेश कर भारतीय टेनिस में नया इतिहास रच दिया है। चेन्नई के एसडीएटी (SDAT) टेनिस स्टेडियम के सेंटर कोर्ट पर शनिवार शाम खेले गए रोमांचक सेमीफाइनल मुकाबले में भारतीय जोड़ी ने दूसरी वरीयता प्राप्त पोलैंड की वेरोनिका फाल्कोव्स्का (Weronika Falkowska) और अमेरिका की अलाना स्मिथ (Alana Smith) की जोड़ी को 6-2, 2-6, [10-8] से पराजित किया। इसके साथ ही रुतुजा और वैष्णवी मुख्य डब्ल्यूटीए टूर स्तर के डबल्स फाइनल में जगह बनाने वाली पहली विशुद्ध भारतीय महिला जोड़ी बन गई हैं।
सुपर टाई-ब्रेक में दिखा संयम और आक्रामकता
घरेलू प्रशंसकों के जबरदस्त समर्थन के बीच उतरी भारतीय जोड़ी ने पहले सेट में आक्रामक खेल दिखाया। रुतुजा और वैष्णवी ने बेहतरीन तालमेल का प्रदर्शन करते हुए विपक्षी टीम की सर्विस दो बार तोड़ी और सेट को 6-2 से अपने नाम कर लिया। हालांकि, दूसरे सेट में 2-2 की बराबरी के बाद भारतीय टीम की लय कुछ कमजोर पड़ी। 21 वर्षीय वैष्णवी अडकर को बाएं कूल्हे में खिंचाव की शिकायत के चलते मेडिकल टाइमआउट भी लेना पड़ा। दूसरी वरीय पोलिश-अमेरिकी जोड़ी ने इस स्थिति का फायदा उठाया और लगातार गेम जीतते हुए दूसरा सेट 6-2 से जीतकर मुकाबला निर्णायक सुपर टाई-ब्रेक में पहुंचा दिया।
सुपर टाई-ब्रेक में तनाव चरम पर था, जहां फाल्कोव्स्का और स्मिथ ने 8-6 की बढ़त हासिल कर ली थी। इस नाजुक मोड़ पर 30 वर्षीय अनुभवी खिलाड़ी रुतुजा भोसले ने शानदार इनसाइड-आउट फोरहैंड से अंक जुटाया और फिर वैष्णवी ने नेट पर बेहतरीन स्मैश लगाकर स्कोर 8-8 से बराबर कर दिया। इसके बाद वैष्णवी के शानदार बैकहैंड वॉली ने भारत को मैच प्वाइंट दिलाया। मैच प्वाइंट पर वैष्णवी के जोरदार डाउन-द-लाइन फोरहैंड शॉट को स्मिथ संभाल नहीं सकीं और भारतीय जोड़ी ने 10-8 से सुपर टाई-ब्रेक जीतकर इतिहास के पन्नों में नाम दर्ज करा लिया।
भारतीय महिला टेनिस के लिए ऐतिहासिक मील का पत्थर
यह उपलब्धि भारतीय टेनिस के लिए बेहद खास है क्योंकि इससे पहले किसी भी पूर्णतः भारतीय महिला जोड़ी ने मुख्य डब्ल्यूटीए टूर के फाइनल में कदम नहीं रखा था। साल 2005 में शिखा उबेरॉय (Shikha Uberoi) और उनकी बहन नेहा उबेरॉय ने सनफीस्ट ओपन तथा ग्वांगझू ओपन के फाइनल में जगह बनाई थी, लेकिन नेहा अमेरिकी नागरिक के तौर पर खेल रही थीं। इसके अलावा भारत की पूर्व दिग्गज खिलाड़ी सानिया मिर्जा (Sania Mirza) ने अपने करियर में 43 डब्ल्यूटीए युगल खिताब जीते, परंतु उन सभी खिताबी सफलताओं में उनकी जोड़ीदार विदेशी खिलाड़ी थीं।
डब्ल्यूटीए 125 श्रेणी में साल 2018 में अंकिता रैना और करमन कौर थांडी ने मुंबई में खिताब जीता था, लेकिन वह मुख्य टूर से निचली श्रेणी की प्रतियोगिता थी। ऐसे में मुख्य डब्ल्यूटीए 250 टूर्नामेंट के खिताबी मुकाबले तक पहुंचना भारतीय टेनिस में एक नया अध्याय जोड़ता है।
खिताबी मुकाबले में स्विस जोड़ी से होगी भिड़ंत
इस ऐतिहासिक जीत के बाद रविवार को होने वाले खिताबी मुकाबले में भारतीय जोड़ी का सामना स्विट्जरलैंड की नैमा करामोको (Naima Karamoko) और सिमोना वाल्टरट (Simona Waltert) से होगा। मैच के बाद रुतुजा ने कहा कि घरेलू धरती पर यह मुकाम हासिल करना बेहद सुखद अनुभव है और उन्हें पहले यह अंदाजा भी नहीं था कि वे ऐसा करने वाली पहली भारतीय जोड़ी बन रही हैं। वहीं युवा खिलाड़ी वैष्णवी ने घरेलू दर्शकों के सहयोग की सराहना करते हुए कहा कि वे फाइनल में भी अपना सर्वश्रेष्ठ खेल दिखाने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।
मैच के प्रमुख बिंदु
- ऐतिहासिक रिकॉर्ड: रुतुजा भोसले और वैष्णवी अडकर मुख्य डब्ल्यूटीए टूर डबल्स फाइनल में पहुंचने वाली पहली पूर्ण भारतीय जोड़ी बनीं।
- सेमीफाइनल का नतीजा: भारतीय जोड़ी ने दूसरी वरीय फाल्कोव्स्का और स्मिथ को 6-2, 2-6, [10-8] से हराया।
- रोमांचक वापसी: सुपर टाई-ब्रेक में 6-8 से पिछड़ने के बाद लगातार अंक बनाकर 10-8 से जीत हासिल की।
- फाइनल मुकाबला: खिताबी जंग में रविवार को भारतीय जोड़ी स्विट्जरलैंड की नैमा करामोको और सिमोना वाल्टरट से भिड़ेगी।
