यूथ ओलंपिक 2026: खुशबू दरजादा ने जूडो में जीता ऐतिहासिक रजत पदक

डकार (सेनेगल) में आयोजित हो रहे डकार 2026 यूथ ओलंपिक खेलों (Dakar 2026 Youth Olympic Games) में भारत की युवा जूडो खिलाड़ी खुशबू रजकभाई दरजादा (Khushbu Rajakbhai Darjada) ने नया इतिहास रच दिया है। सोमवार की देर शाम डायमनियादियो स्थित डकार एक्सपो सेंटर में खेले गए महिला 63 किलोग्राम भारवर्ग के रोमांचक फाइनल मुकाबले में खुशबू ने रजत पदक (Silver Medal) अपने नाम किया। 15 वर्षीय खुशबू यूथ ओलंपिक के इतिहास में जूडो स्पर्धा का पदक जीतने वाली भारत की केवल दूसरी खिलाड़ी बन गई हैं। उनकी इस स्वर्णिम उपलब्धि ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारतीय खेल का मान एक बार फिर ऊंचा किया है।

फाइनल तक का अजेय सफर और शानदार तकनीक

गुजरात के ऐतिहासिक सिद्दी समुदाय से आने वाली खुशबू ने प्रतियोगिता के पहले ही दौर से जबर्दस्त आक्रामकता और तकनीकी संतुलन का मुजाहिरा किया। प्री-क्वार्टर फाइनल मुकाबले में उन्होंने गिनी की मामाईसाता कमारा (Mamaissata Camara) को तकनीकी युक्ति के दम पर 1-0 (यूको) से शिकस्त देकर अपने अभियान का जोरदार आगाज किया था।

इसके बाद क्वार्टर फाइनल में भारतीय जूडोका ने मोरक्को की मजबूत प्रतिद्वंद्वी अबीर बुआज़ाउई (Abir Bouazzaoui) को पूरे नियंत्रण के साथ पटकते हुए ‘इप्पोन’ (Ippon) के जरिए मुकाबला समय से पहले खत्म कर दिया। सेमीफाइनल में उनका सामना अल्जीरिया की दुनिया बेर्राहौल (Dounia Berrahoual) से हुआ। इस कड़े मुकाबले में खुशबू के आक्रामक खेल के दबाव में प्रतिद्वंद्वी खिलाड़ी को गंभीर फाउल के चलते हनसोकु-माके (Hansoku-make) की पेनल्टी मिली, जिसके आधार पर भारतीय खिलाड़ी ने सीधे फाइनल में प्रवेश कर देश के लिए पदक पक्का कर लिया।

खिताबी मुकाबले में कैडेट विश्व चैंपियन से टक्कर

स्वर्ण पदक के निर्णायक मुकाबले में खुशबू का मुकाबला जर्मनी की प्रतिभाशाली कैडेट विश्व चैंपियन जोलिना रेनहोल्ड (Jolina Reinhold) से हुआ। खिताबी भिड़ंत में खुशबू ने शुरुआत में सतर्क रक्षात्मक खेल दिखाया, लेकिन जर्मन खिलाड़ी ने अपने अनुभव और गति का फायदा उठाते हुए सही दांव खेला और इप्पोन हासिल कर स्वर्ण पदक जीत लिया। इसके साथ ही भारतीय जूडोका खुशबू को रजत पदक से संतोष करना पड़ा।

मुकाबले के बाद खुशबू ने कहा कि यूथ ओलंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व करना उनका सबसे बड़ा सपना था और पोडियम पर खड़े होकर तिरंगा लहराते देखना उनके लिए अत्यंत गर्व का क्षण है। उन्होंने यह भी माना कि फाइनल मुकाबले से उन्हें सीखने को काफी कुछ मिला है और वे आगामी अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के लिए अपने रिएक्शन टाइम और तकनीक को और धार देंगी।

प्रमुख बिंदु: भारतीय जूडो के लिए ऐतिहासिक दिन

  • ऐतिहासिक रजत: खुशबू रजकभाई दरजादा ने महिलाओं के 63 किग्रा भारवर्ग में रजत पदक जीता।
  • दूसरी भारतीय जूडोका: यूथ ओलंपिक इतिहास में जूडो का पदक जीतने वाली वह देश की दूसरी खिलाड़ी बनीं।
  • तबाबी देवी की बराबरी: इससे पहले वर्ष 2018 के ब्यूनस आयर्स यूथ ओलंपिक में थंगजाम तबाबी देवी (Thangjam Tababi Devi) ने 44 किग्रा वर्ग में रजत पदक जीता था।
  • शानदार अभियान: खुशबू ने शुरुआती दौर में गिनी, मोरक्को और अल्जीरियाई प्रतिद्वंद्वियों को एकतरफा अंदाज में हराया।

भारतीय खेलों के लिए नए युग की शुरुआत

भारत के लिए ओलंपिक स्तर की कुश्ती और मुक्केबाजी में लंबे समय से पदक आते रहे हैं, लेकिन जूडो जैसे खेल में इस प्रकार का वैश्विक प्रदर्शन भारतीय खेल ढांचे के लिए बड़ा मील का पत्थर साबित हो रहा है। खेल विशेषज्ञों का मानना है कि ग्रासरूट स्तर पर प्रतिभाओं की सही पहचान और आधुनिक कोचिंग के चलते छोटे शहरों और ग्रामीण अंचलों की प्रतिभाएं सीधे वैश्विक पटल पर चमक रही हैं। 15 साल की उम्र में खुशबू का यह रजत पदक भविष्य के सीनियर ओलंपिक अभियानों के लिए भारतीय दल के आत्मविश्वास को कई गुना बढ़ाने वाला साबित होगा।