चिन्मय सुतार ने तोड़ा 123 साल पुराना विश्व रिकॉर्ड, रचा नया इतिहास

भारतीय घरेलू क्रिकेट के सबसे प्रतिष्ठित टूर्नामेंट रणजी ट्रॉफी (Ranji Trophy) 2026-27 के चौथे दौर के दूसरे दिन, मंगलवार (3 नवंबर 2026) को मिजोरम के स्टार बल्लेबाज चिन्मय सुतार (Chinmay Sutar) ने एक ऐतिहासिक उपलब्धि अपने नाम कर ली। अरुणाचल प्रदेश (Arunachal Pradesh) के खिलाफ प्लेट ग्रुप मुकाबले में शानदार शतकीय पारी खेलते हुए 29 वर्षीय चिन्मय ने प्रथम श्रेणी क्रिकेट (First-Class Cricket) में अपने करियर की शुरुआती पांच पारियों में सर्वाधिक रन बनाने का 123 साल पुराना विश्व रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिया। इस जादुई प्रदर्शन के साथ ही उन्होंने विश्व क्रिकेट के दिग्गजों की सूची में अपना नाम स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज करा लिया है।

ऑस्ट्रेलियाई दिग्गज बिल पोंसफोर्ड का रिकॉर्ड पीछे छूटा

प्रथम श्रेणी क्रिकेट के इतिहास में शुरुआती पांच पारियों में सबसे ज्यादा रन बनाने का विश्व कीर्तिमान ऑस्ट्रेलिया के महान बल्लेबाज बिल पोंसफोर्ड (Bill Ponsford) के नाम दर्ज था। पोंसफोर्ड ने वर्ष 1921 से 1923 के बीच अपनी शुरुआती पांच पारियों में 724 रन बनाए थे। पिछली सवा सदी यानी 123 वर्षों से कोई भी बल्लेबाज इस विशाल आंकड़े को पार नहीं कर सका था। मंगलवार को चिन्मय सुतार ने अरुणाचल प्रदेश के गेंदबाजी आक्रमण की धज्जियां उड़ाते हुए अपनी पांचवीं प्रथम श्रेणी पारी में जैसे ही यह आंकड़ा पार किया, उन्होंने इतिहास रच दिया। अब उनकी शुरुआती पांच पारियों में कुल रनों की संख्या 748 हो गई है।

शुरुआती पारियों में चिन्मय का स्वर्णिम सफर

चिन्मय सुतार का मौजूदा रणजी सत्र किसी सपने की तरह रहा है। उन्होंने डेब्यू के बाद से हर मुकाबले में असाधारण निरंतरता और धैर्य का परिचय दिया है:

  • डेब्यू मैच (बनाम मणिपुर): पहले ही मुकाबले में शतक के बेहद करीब पहुंचे, लेकिन दुर्भाग्यवश 99 रन पर रन आउट हो गए।
  • दूसरा मैच (बनाम नागालैंड): नागालैंड के खिलाफ 517 गेंदों पर 46 चौकों और 7 छक्कों की मदद से नाबाद 400 रन बनाकर इतिहास रचा।
  • तीसरा मैच (बनाम मेघालय): शानदार फॉर्म जारी रखते हुए 125 रनों की शतकीय पारी खेली।
  • चौथा मैच (बनाम अरुणाचल प्रदेश): लगातार तीसरा शतक ठोककर पांच पारियों में 748 रन पूरे किए और विश्व रिकॉर्ड बनाया।

नागालैंड के खिलाफ लगाया था ऐतिहासिक चौहरा शतक

चिन्मय सुतार इस सत्र में लगातार दूसरी बार राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का केंद्र बने हैं। इससे पहले दूसरे दौर के मुकाबले में उन्होंने नागालैंड के खिलाफ नाबाद 400 रनों की अविश्वसनीय पारी खेली थी। रणजी ट्रॉफी के 92 साल के इतिहास में वह चौहरा शतक (Quadruple Century) लगाने वाले सिर्फ दूसरे बल्लेबाज बने थे। उनसे पहले केवल महाराष्ट्र के बीबी निम्बालकर (B.B. Nimbalkar) ने 1948 में नाबाद 443 रन बनाए थे। चिन्मय ने पृथ्वी शॉ के 379 रनों के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ते हुए रणजी ट्रॉफी का दूसरा सबसे बड़ा व्यक्तिगत स्कोर बनाया था।

मुंबई से मिजोरम तक का प्रेरणादायी सफर

चिन्मय सुतार का ताल्लुक मुंबई से है और उनके पिता राजेश सुतार (Rajesh Sutar) भी मुंबई के पूर्व प्रथम श्रेणी क्रिकेटर रहे हैं। चिन्मय ने 2019 में भारत की अंडर-23 टीम का प्रतिनिधित्व करते हुए एसीसी इमर्जिंग टीम्स एशिया कप खेला था। मुंबई की घरेलू टीम में कड़े मुकाबले और पर्याप्त अवसर न मिलने के बाद उन्होंने इस सत्र में मिजोरम का रुख किया। मिजोरम के लिए उनका यह फैसला मील का पत्थर साबित हुआ, जहां उन्होंने अपनी जबरदस्त तकनीक और लंबी पारियां खेलने की क्षमता से पूरे क्रिकेट जगत का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। क्रिकेट विश्लेषकों का मानना है कि चिन्मय की यह ऐतिहासिक उपलब्धि उन्हें जल्द ही भारतीय ए टीम और आईपीएल में बड़ा मंच दिला सकती है।